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क्यों दिल उनसे चाहे हज़ार बातें

क्यों दिल उनसे चाहे हज़ार बातें, क्यों निगाहें उन्हें ढूंढे आते जाते।  क्यों आजकल दिन कटे राहें तकते, क्यों आजकल गिन गिन कटे रातें। 

उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में

हम हैं जमीं पर वो है आसमानों में  उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में कभी आओ महफिल में इन्हें सजाकर  देखो इन्हें हमारी निगाहों से मिलाकर  निगाहें मिलाकर लगा आ गए मयखानों में उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में निगाहें पहले झुकाते हो फिर उठाते हो  दिल की बात निगाहों से बताते हो  इनसे वार कर हमें सताते हो  दिल में नहीं कुछ ये जताते हो न ढहाओ सितम इन निगाहों के हम दिवानों में  उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में

हमारी बातों में उनका गौर नजर आए

हमारी बातों में उनका गौर नजर आए पर उनके दिल में कुछ और नजर आए।  यूँ तो ज़माने में ना उनसा कोइ,  पर पूनम की रात में बतौर नजर आए। फ़ूलों से सजी हुई कभी जुल्फे अपनी प्यारी देखो।  क्यूँ लगता तुम्हें नहीं तुम खूबसूरत, कभी खुद को नजरों से हमारी देखो।  चुराने लगें हैं नज़रे, एसा दौर नजर आए।   उनकी नजर ढूंढे ज़माने में लाखों फसाने, हमें उनके सिवा ना कुछ और नजर आए ।