हम हैं जमीं पर वो है आसमानों में
उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में
कभी आओ महफिल में इन्हें सजाकर
देखो इन्हें हमारी निगाहों से मिलाकर
निगाहें मिलाकर लगा आ गए मयखानों में
उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में
निगाहें पहले झुकाते हो फिर उठाते हो
दिल की बात निगाहों से बताते हो
इनसे वार कर हमें सताते हो
दिल में नहीं कुछ ये जताते हो
न ढहाओ सितम इन निगाहों के हम दिवानों में
उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में

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