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ओढ़कर वसन-ए-इश्क












ओढ़कर वसन-ए-इश्क,
दिल-ए-नादां दीदार चाहे। 
चाहे दिल इश्तिहार-ए-मोहब्बत,
मगर साजन इन्तज़ार चाहे। 

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हमारी बातों में उनका गौर नजर आए

हमारी बातों में उनका गौर नजर आए पर उनके दिल में कुछ और नजर आए।  यूँ तो ज़माने में ना उनसा कोइ,  पर पूनम की रात में बतौर नजर आए। फ़ूलों से सजी हुई कभी जुल्फे अपनी प्यारी देखो।  क्यूँ लगता तुम्हें नहीं तुम खूबसूरत, कभी खुद को नजरों से हमारी देखो।  चुराने लगें हैं नज़रे, एसा दौर नजर आए।   उनकी नजर ढूंढे ज़माने में लाखों फसाने, हमें उनके सिवा ना कुछ और नजर आए । 

उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में

हम हैं जमीं पर वो है आसमानों में  उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में कभी आओ महफिल में इन्हें सजाकर  देखो इन्हें हमारी निगाहों से मिलाकर  निगाहें मिलाकर लगा आ गए मयखानों में उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में निगाहें पहले झुकाते हो फिर उठाते हो  दिल की बात निगाहों से बताते हो  इनसे वार कर हमें सताते हो  दिल में नहीं कुछ ये जताते हो न ढहाओ सितम इन निगाहों के हम दिवानों में  उनकी सी निगाहें देखी नहीं ज़मानों में